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PATNA: बिहार के सभी 38 जिलों में वृद्धाश्रम को लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी रिपोर्ट

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार के सभी 38 जिलों में वृद्धाश्रम की व्यवस्था और बुजुर्गों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से अद्यतन जानकारी मांगी है।

PATNA: बिहार के बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की व्यवस्था से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत के सामने राज्य के सभी 38 जिलों में वृद्धाश्रम की उपलब्धता, निर्माण की स्थिति और वहां बुजुर्गों को दी जा रही सुविधाओं का मुद्दा उठा। सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से इस दिशा में अब तक उठाए गए कदमों की अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।

यह मामला मधुकर आनंद की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में बुजुर्गों के लिए जिला स्तर पर वृद्धाश्रम उपलब्ध कराने और वहां रहने वाले असहाय वरिष्ठ नागरिकों को जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष यह मुद्दा रखा गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुजुर्गों के लिए आश्रय, देखभाल और आवश्यक सेवाओं को लेकर दिए गए निर्देशों का बिहार में प्रभावी तरीके से पालन होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान बुजुर्गों की चिकित्सा सुविधा और रोजमर्रा की देखभाल का विषय भी प्रमुखता से सामने आया। जनहित याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि वृद्धाश्रम केवल रहने की जगह तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि वहां रहने वाले बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवा, भोजन, सुरक्षा और नियमित देखभाल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।

याचिका में मुजफ्फरपुर के वृद्धाश्रम का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत को बताया गया कि वहां रहने वाले कुछ बुजुर्गों को दूसरे जिलों में स्थानांतरित किए जाने की स्थिति सामने आई है। इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसडी संजय ने सरकार का पक्ष रखा और बताया कि मुजफ्फरपुर में समाज कल्याण विभाग की ओर से नया वृद्धाश्रम भवन तैयार किया जा रहा है।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नए भवन में बुजुर्गों को स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जा रही है और वहां आवश्यक बुनियादी तथा चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। राज्य सरकार ने यह भी बताया कि समाज कल्याण विभाग की सक्षम योजना के तहत जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में वृद्धाश्रम से संबंधित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने केवल मुजफ्फरपुर की स्थिति तक मामले को सीमित नहीं रखा। अदालत ने बिहार के सभी जिलों में वृद्धाश्रम के निर्माण और उनकी वर्तमान स्थिति से जुड़ी जानकारी मांगी। इससे साफ है कि अब सरकार को जिला स्तर पर वृद्धाश्रम की उपलब्धता, निर्माण की प्रगति और बुजुर्गों को मिलने वाली सुविधाओं का विस्तृत ब्यौरा अदालत के सामने रखना होगा।

इस मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई। पटना हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर न्यायिक कार्यवाही और संबंधित न्यायिक सूचनाएं उपलब्ध रहती हैं।

बिहार जैसे बड़े राज्य में बुजुर्गों के लिए जिला स्तर पर पर्याप्त आश्रय और देखभाल की व्यवस्था एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा है। कई वरिष्ठ नागरिक ऐसे होते हैं जिनके पास परिवार का सहारा नहीं होता या वे आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण अकेले जीवन गुजारने को मजबूर होते हैं। ऐसे लोगों के लिए वृद्धाश्रम केवल छत नहीं बल्कि सुरक्षा और सम्मान का माध्यम भी बन सकता है।

हाईकोर्ट द्वारा सभी 38 जिलों की स्थिति की जानकारी मांगे जाने के बाद अब सरकार के सामने यह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी होगी कि किन जिलों में वृद्धाश्रम मौजूद हैं, कहां नए भवन बन रहे हैं और किन स्थानों पर अभी व्यवस्था पूरी नहीं हुई है। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि इन केंद्रों में बुजुर्गों को वास्तविक रूप से किस स्तर की चिकित्सा और देखभाल मिल रही है।

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बुजुर्गों की देखभाल व्यवस्था पर अब जवाबदेही जरूरी

वृद्धाश्रम का निर्माण अपने आप में किसी योजना की सफलता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। असली सवाल यह है कि वहां रहने वाले बुजुर्गों को किस तरह की जिंदगी मिल रही है। पर्याप्त भोजन, स्वच्छ वातावरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, दवाइयां, प्रशिक्षित कर्मचारी और सुरक्षा जैसी सुविधाएं किसी भी वृद्धाश्रम की बुनियादी जरूरत होनी चाहिए।

हाईकोर्ट का यह रुख इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि अब सरकार को केवल भवन निर्माण की जानकारी नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यदि किसी जिले में भवन बनकर तैयार है लेकिन वहां पर्याप्त कर्मचारी या चिकित्सा सुविधा नहीं है तो ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

चार सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट से यह तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है कि बिहार के 38 जिलों में वृद्धाश्रम को लेकर जमीनी स्थिति क्या है। जरूरत इस बात की है कि बुजुर्गों के लिए बनाई जाने वाली व्यवस्था कागजों तक सीमित न रहे और उन्हें वास्तव में सम्मान, सुरक्षा तथा बेहतर जीवन का अधिकार मिले।

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